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बगदना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बगदना † क्रि अ॰ [सं॰विकृत गुज॰ बगड़(=बदमाश), हिं॰ बिगड़ना]

१. बिगड़ना । क्रुद्ध होना ।

२. नष्ट होना । खराब होना ।

३. बहकना । भूलना ।

४. च्युत होना । ठीक रास्ते से हट जाना ।

५. लौटना । वापस होना । उ॰— (क) आगे करि दै गौधन वृंद । बदन चूमि व्रज बगदे वंद । नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ २७५ । (ख) कछु दिन रहें बगदि ब्रज आवनि । ब्रज पर आनंदघन बरसावनि ।— घनानंद, पृ॰ ३१७ ।