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बगरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बगरना पु † क्रि॰ अ॰ [सं॰ विकिरण]

१. फैलना । बिखरना । छितराना । उ॰—(क) तनपोषक नारी नरा सिगरे । परिनिंदक ते जग मों बगरे ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) रीझे श्याम नागरी रूप । तैसी ये लठ बगरीं ऊपर स्रवत नीर अनूप ।—सूर (शब्द॰) । (ग) वीथिन में, व्रज में, नवेलिन में, वेलिन में, वनन में बागन में बगरो बसंत है ।—पद्माकर (शब्द॰) ।

२. घूमना फिरना । परिभ्रमण करना । उ॰— कबीर देश हम बगरिया ग्राम ग्राम सब खौर ।— कबीर मं॰, पृ॰ ३२४ ।