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बगराना

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शब्दसागर

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बगराना † क्रि॰ सं॰ [हिं॰ बगरना का सक॰ रूप] फैलाना । छितराना । छिटकाना । उ॰—(क) ते दिन बिसरि गए ह्याँ आए । अति उन्मत्त मोह मद छाए फिरत केश बगराए ।— सूर (शब्द॰) । (ख) जानिए न आली यह छोहर जसोमति को बाँसुरी बजाइगो कि विष बगराइगो ।— रसखानि (शब्द॰) । (ग) सजनी इहि गोकुल में बिष सो बगरायो है नंद के सावरियाँ ।— रसखान (शब्द॰) ।

बगराना ^२ क्रि॰ अ॰ बगरना । फैलना । बिखरना । उ॰— कहाँ लों बरनों सुंदरताई । अति सुदेश मृदु हरत चिकुर मन मोहन मृख बगाराई ।— सूर (शब्द॰) ।