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बगाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बगाना पु ^१ ‡ क्रि॰ सं॰ [हिं॰ बगना का प्रे॰ रूप]

१. टहलाना । सैर कनाना । घुमाना । फिराना । उ॰— लघु लघु कंचन के हय हाथी स्यदन सुभग बनाई । तिन मँह धाय चढ़ाय कुमारन लावहिं अजिर बगाई ।—रघुराज (शब्द॰) ।

२. फैलाना । बिखेरना । छितरा देना । उ॰—(क) टूटि तार अगर बगाबै । कामभून जनु मोहि छरावै ।—नदं॰ ग्रं॰, पृ॰ १३४ । (ख) चोरि चोरि दधि माखन खाइ । जौ हम देहि तो देइ बगइ ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ २४६ ।

बगाना पु ^२ क्रि॰ अ॰ भागना । जल्दी जल्दी जाना । उ॰— बार बार बैल को निपट ऊँचो नाद सुनि, हूँकरत बाघ बिरुझनों रस रेला में । 'भूधर' भनत ताकी बास पाय सोर करि कृत्ता कोतवाल को बगानो बगमेला में ।— भूषर (शब्द॰) ।