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बजमार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बजमार पु † वि॰ [हिं॰ बज्र + मारा] [स्त्री॰ बजमारी] बज्र से मारा हुआ । जिसपर बज्र पड़ा हो । उ॰— (क) दान लेहु देहु जान काहे को कान्ह देत हो गारो । जो कोऊ कह्यो करै रीहठ याही मारग आवै बजमारी ।— सूर (शब्द॰) । (ख) ये अलि इकंत पाइ पायन परै हैं आय हौं न तंब हेरी या गुमान बजमारे सों ।— पद्माकर (शब्द॰) । (ग) जा बजमारे अब मैं तो सों भूलि कछू नहि कहिहौं ।— अयौध्या॰ (शब्द॰) । विशेष— इस शब्द का प्रयोग प्रायः स्त्रियाँ गाली या शाप के रूप में करती हैं ।