बझना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बझना पु † क्रि॰ अ॰ [सं॰ बद्ध, प्रा॰ बज्झ + हिं॰ ना (प्रत्य॰)]
१. बंधन में पड़ना । बँधना । उ॰— जीव परयो या ख्याल मे अरु गए दसा दस । बझे जाय खगवृंद ज्यों प्रिय छबि लटकनि लस ।—सूर (शब्द॰) । (ख) सुने नाना पुरान मिटत नहिं अज्ञान पढै़ न समुझै जिमि खग कीर । बझत बिनहि पास सेमर सुमन आस करत चरत तेऊ फल बिनु ही ।—तुलसी (शब्द॰) ।
२. अटकना । उलझना । फैसना । जैसे, काम में बझना ।
३. हठ करना । टेक करना । उ॰— उपरोहित निमिवंश को शतानंद मुनिराय । लियो नेग बझि राम सो, सम हिय वसो सदाय ।—रघुराज (शब्द॰) ।