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बटपरा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बटपरा पु † संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'बटपार' । उ॰— (क) चित वित वचन न हरत हठि लालन दृग बरजोर । सावधान के बटपरा वे जागत के चोर ।—बिहारी (शब्द॰) । (ख) नेह नगर मैं कहु तुहीं कौन बसै सुख चैन । मनधन लुटत सहज मैं लाल बटपरा नैन ।—स॰ सप्तक, पृ॰ १९१ ।