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बड़वाग्नि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बड़वाग्नि संज्ञा पुं॰ [सं॰ बड़वाग्नि] समुद्रग्नि । समुद्र के भीतर की आग या ताप । विशेष—भूगर्भ के भीतर जो अग्नि है उसी का ताप कहीं कहीं समुद्र के जल को भी खौलाता है । कालिका पुराण में लिखा है कि काम को भस्म करने के लिये शिव ने जो क्रोधानल उत्पन्न किया था उसे ब्रह्मा ने बडवा या घोडी के रूप में करके समुद्र के हवाले कर दिया जिसमें लोक की रक्षा रहे । पर वाल्मीकि रामायण में लिखा है कि बड़वाग्नि और्व ऋषि का क्रोधरूपी तेज है जो कल्पांत में फैलकर संसार को भस्म करेगा ।