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बदधसूतक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बदधसूतक संज्ञा पुं॰ [सं॰] रसेश्वरदर्शन के अनूसार बदध रस या पारा । विशेष—यह अक्षत, लघुद्रावी, तेजोविशिष्ट, निर्मल और गुरु कहा गया है । रसेश्वरदर्शन में देह को स्थिर या अमर करने पर मुक्ति कही गई हैं । यह स्थिरता रम या पारे की सिद्धि द्वारा प्राप्त होती है ।