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बदना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बदना पु क्रि॰ स॰ [सं॰ √बद( = कहना)] कहना । वर्णन करना । उ॰—(क) विष्णु शिवलोक सोपान सम सर्वदा दास तुलसी बदत बिमल बानी ।—तुलसी(शब्द) । (ख)पानि जोरि कैमास बदै तब राज प्रति । उर अवलोकित उलसत सामंत राज अति ।—पृ॰ रा॰,६ ।२४० ।

२. मान लेना । स्वीकार करना । सकारना । जैसे,किसी को साखी बदना, गवाह बदना । उ॰—हाथ छुड़ाए जात हो निबल जानि कै मोहि । हिरदय में से जाइयो मर्द बदौंगी तोहि ।—(शब्द॰) ।

३. नियत करना । ठहराना । पहले से स्थिर करना । ठीक करना । निश्चित करना । कहकर पक्का कर लेना । जैसे, कुश्ती का मुकाम बदना, दाँब बदना । उ॰—(क)श्याम गए वदि अवधि सखी री ।—सूर(शब्द) । (ख) दूती सों संकेत बदि लेन पठाई आप ।—केशव(शब्द॰) । मुहा॰—बदा होना = भाग्य में बदा होना । भाग्य में लिखा होना । प्रारब्ध में होना । जैसे—अब तो चलते हैं, जो बदा होगा सो होगा । बदकर (कोई काम करना) = जान बुझकर । पूरी दृढ़ता के साथ । पूरे हठ के साथ । टेक पकड़कर । जैसे,—जिस काम को मना करते हैं वह बदकर करता है । (२) बेधड़क । ललकारकर । छेड़कर । आप अग्रसर होकर । जैसे,—न जाने क्यों वह मुझसे बढकर झगडा करता है । बदकर कहना = दृढ़ता के साथ कहना । पूरे निश्चय के साथ कहना । जैसे,—हम बदकर कहते हैं कि तुग्हारा यह काम हो जायगा ।

४. सफलता पर जीत और असफलता पर हार मानने की शर्त पर कोई बात ठहराना । बाजी लगाना । होड़ लगाना । शर्त लगाना । जैसे,—आज उस मैदान में पहलवानों की कुश्ती बदी है । (ख) हम उससे कुश्ती बदेंगे ।

५. गिनती में लाना । लेखे में लाना । कुछ समझना । कुल ख्याल करना । बडा़ या महत्व का मानना । जैसे,—वह लड़का इतना धृष्ट हो गया है कि किसी को कुछ नहीं बदना । उ॰—(क)बदत काहू नहीं निधरक निदरि मोहिं न गनत । बार बार बुझाय हारी भौंह मो पै तनत ।— सूर, (शब्द॰) । (ख) जोबन दान लेऊँगो तुम सों । जाके बल तुम बदति न काहुहि कहा दुरावति मों सो ।—सूर (शब्द) । (ग) तौ बदिहौं जो राखिहौ हाथनि लखि मन हाथ ।—बिहारी(शब्द॰) ।