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बनक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बनक पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ वणिक्] दे॰ वणिक् । उ॰—बंभन बनंक कापथ्थ संग, पसवान लोग जे रषिक अंग ।—पृ॰ रा॰, १४ ।१२६ ।

बनक पु ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ बनना]

१. बनावट । सजावट । सज- धज ।— उ॰—द्विजदेव की सौं ऐसी बनक निकाई देखि, राम की दुहाई मन होत है निहाल मम ।—द्विजदेव(शब्द॰) ।

२. बाना । बेष । भेस । उ॰—अरुन नील पियरे लसत अंकन सुमन समाज । अरी आज रितुराज की बनक बनै ब्रजराज ।—स॰ सप्तक, पृ॰ ३७५ ।

३. मित्रता । दोस्ती । उ॰—जासों अनबन मोही, तासों बनक बनी तुम्हें ।— घनानंद पृ॰ २०६ ।

बनक ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वन + क(प्रत्य॰)] बन की उपज । जगल की पैदावार । जैसे, गोंद, लकड़ी, शहद आदि ।

बनक पु ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ वर्णक] वर्ण, रंग । उ॰—केसरि कनक कहा चंपक बनक कहा ? दामिनी यों दुरि जात देह की दमक तैं ।—मति॰ ग्रं॰, पृ॰ ३०७ ।