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बफरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बफरना † क्रि॰ अ॰ [सं॰ विस्फुरण] बढ़ बढ़कर बातें करना दे॰ 'बिफरना' । उ॰ (क) संध्या समय घर आया, तो बफरने लगा । अब देखता हूँ कौन माई का लाल इनकी हिमायत करता है ।—रंगभूमि, भा॰ २, पृ॰ ५८७ । (ख) हरनाथ कुशल योदघा की भाँति शत्रु को पीछे हटता देखकर, बफरकर बोला ।—मान॰, भा॰ ५, पृ॰ १९३ ।