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बफारा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बफारा संज्ञा पुं॰ [ सं॰ वाप्प, हिं॰ बाफ, भाप + श्रारा (प्रत्य॰)]

१. ओषधिमिश्रित जल को औटाकर उसकी भाप से शरीर के किसी रोगी अंग को सेंकने का काम । उ॰—आय सकारे हिय सकुचि, पाय पधारे ऐन । तिय नागरि तिय नँन तकि लगी बफारे दैन ।—स सप्तक, पृ॰ २४७ । क्रि॰ प्र॰—देना ।—लेना ।

२. वह ओषधि जिसकी भाप से इस प्रकार का सेंक किया जाय ।

३. वाष्प । भाप ।