बरकना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बरकना ^१ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ बरकाना]
१. कोई बुरी बात न होने पाना । न घटित होना । निवारण होना । बचना । जैसे, झगड़ा बरकना ।
२. अलग रहना । हटना । दूर रहना ।
बरकना पु ^२ क्रि॰ अ॰ [सं॰ वल्गन (=बहुत बोलना), हिं॰ बलकना, गुजच बरकुवुँ] आवेश में उत्साहित होकर बोलना या चिल्लाना । बलकना । उ॰—बरकि कन्ह चहुआँत करि, तिल तिल सम तन तुंड ।—पृ॰ रा॰, ५ । ८९ ।