बरच्छा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बरच्छा † संज्ञा पुं॰ [सं॰ वर + ईक्षा(=ईक्षण)] विवाह की बात पक्की होने पर वर के पिता के हाथ में जनेऊ, द्रव्य और फल रखने की रीति । इसे लोग बरछेकाई भी कहते हैं ।
बरच्छा † संज्ञा पुं॰ [सं॰ वर + ईक्षा(=ईक्षण)] विवाह की बात पक्की होने पर वर के पिता के हाथ में जनेऊ, द्रव्य और फल रखने की रीति । इसे लोग बरछेकाई भी कहते हैं ।