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बरुना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बरुना ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ वरुण] एक सीधा सुंदर पेड़ जिसकी पत्तियाँ साल में एक बार झड़ती हैं । बन्ना । बलासी । विशेष—कुसुम काल में यह पेड़ फूलों से लद जाता है । फूल सफेद और सुगंधित होते हैं । इसकी लकड़ी चिकनी और मजबूत होता है जिसे खरादकर अच्छी अच्छी चीजें बनती हैं । ढोल, कंघियाँ और लिखने की पट्टियाँ इस लक़ड़ी की अच्छी बनती हैं । बरुना भारतवर्ष के सभी प्रंतों में होता है और बरसात में बीजों से उगता है । इसे बन्ना और बलासी भी कहते हैं ।

बरुना ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वरुणा] दे॰ 'वरुणा' (नदी) ।

बरुना पु ^३ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'बरुनी' । उ॰—धनुक सर्मा है भिर्कुठी, बरुना चोखी बान ।—इंद्रा॰, पृ॰ १८ ।