बरेँड़ा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बरेँड़ा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वरण्डक (=गोला, गोल लकड़ी)]
१. लकड़ी का वह मोटा गोल लट्ठा जो खपरैल या छाजन क ी लंबाई के बल एक पाखे से दूसरे पाखे तक रहता है । इसी के आधार पर छप्पर या छाजन का टट्टर रहता है ।
२. छाजन गा खपरैल के बीचोबीच का सबसे ऊँचा भाग । उ॰—यह उपदेश सेंत ना भाए जो चढ़ि कहौ बरेंड़े ।—सूर (शब्द॰) ।