सामग्री पर जाएँ

बरोक

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

बरोक ^१ संज्ञा पु॰ [हिं॰ वर + रोक] वह द्रव्य जो कन्या पक्ष से बर पक्ष को यह सूचित करने के लिये दिया जाता है कि संबंध की बातचीत पक्की हो गई । इसकी द्वारा वर रोका रहता है । अर्थात् उससे और किसी कन्या के साथ विवाह की बातचीत नहीं हो सकती । बरच्छा । फलदान । उ॰—(क) राजा कहै गरब से अहौं इंद्र सिवलोक । सो सरवरि हैं मोरे कासे करउँ बरोक ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ २० । (ख) भा बरोक तब तिलक सँवारा ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ ११९ ।

बरोक ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ बलौक] सेना । फौज ।

बरोक ^३ क्रि॰ वि॰ [सं॰ बलौक] बलपूर्वक । जबरदस्ती । उ॰— धावन तहाँ पठावहु देहिं लाख दस रोक । होइ सो बेली जेहि बारी आनहिं सबहि बरोक ।—जायसी (शब्द॰) ।