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बलकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बलकना क्रि॰ अ॰ [सं॰ वल्गन (=बढ़कर बोलना)]

१. उबलना । उफान खाना । खोलना ।

२. उमड़ना । उमगना । उमंग या आवेश में होना । जोश में होना । उ॰—(क) प्रेम पिए बर बारुणी बलकत बल न सँभार । पग डग मग जित तित धरति मुकुलित अलक लिलार ।—सूर (शब्द॰) । (ख) बलकि बलकि वोलति बचन ललकि ललकि लपटाति । बिहारी (शब्द॰) ।

३. बकना झकना । बढ़कर बोलना । उ॰—कहत है और करत है औरे बलकत फिरत अनेरा ।— भीखा॰ श॰, पृ॰ ४ ।