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बहराना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बहराना ^१ क्रि॰ स॰ [हिं॰ भुराना (भ का उच्चारण बह के रूप में हो गया) या फा॰ बहाल]

१. जिस बात से जी ऊबा या दुखी हो उसकी ओर से ध्यान हटाकर दूसरी ओर ले जाना । ऐसी बात कहना या करना जिससे दुःख की बाद भूल जाय और चित्त प्रसन्न हो जाय । उ॰—मैं पठवत अपने लरिका को आवै मन बहराइ ।—सूर (शब्द॰) ।

२. बहकाना । भुलाना । फुसलाना । उ॰—(क) उरहन देत ग्वालि जे आई तिन्है जशोदा दियो बहराई ।—सूर (शब्द॰) । (ख) क्यों बहरावत झूठ मोहिं और बढ़ावत सोग । अब भारत में नाहि वे रहे बीर जे लोग ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।

बहराना † ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ बाहर] दे॰ 'बहरियाना' ।

बहराना ^३ क्रि॰ अ॰ बाहर होना । दे॰ 'बहरियाना' २ ।' उ॰— भोर ठहरात न कपूर बहरात मेध सरद उड़ात बात लाके दिसि दस को ।—भूषण ग्रं॰, पृ॰ ९ ।

२. बहरा बनने का नाटक करना ।