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बहिर्जानु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बहिर्जानु अव्य॰ [सं॰] हाथों को दोनों घुटनों के बाहर किए हुए (बीच में नहीं) । विशेष—श्राद्ध आदि कृत्यों में इस प्रकार बैठने का प्रयोजन पड़ता है ।