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बहीर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बहीर संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ भीड़]

१. भीड़ । जनसमूह । उ॰—जिहि मारग गे पंडिता तेही गई बहीर । ऊँची घाटी राम की तिहि चढ़ि रहे कबीर ।—कबीर (शब्द॰) ।

२. सेना के साथ साथ चलनेवाली भीड़ जिसमें साईस, सेवक, दूकानदार आदि रहते हैं । फोज का लवाज । उ॰—ऐसे रघुबीर छीर नीर के विवेक कवि भीर की बहीर को समय के निकारिहौं ।— हनुमान (शब्द॰) ।

३. सेना की सामग्री । फौज का सामान । उ॰—हुकुम पाय कुतवाल ने दई बहीर लदाय ।— सूदन (शब्द॰) । (ख) कब आय हौ औसर जान सुजान बहीर लों बैस तौ जाति लदी ।—रसखान॰, पृ॰ ७५ ।

बहीर पु ‡ ^२ अव्य [सं॰ बहिस्, बहिर्] बाहर । उ॰—कोऊ जाय द्वार ताहि देत हैं अढ़ाई सेर । बेर जनि खाओ चले जाव यों बहीर के ।—प्रियादास (शब्द॰) ।