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बहुराना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बहुराना क्रि॰ स॰ [हिं॰ बहुरना का सक॰ रूप] बिदा करना । लोटाना । उ॰—(क) बहुराइ देव कवियन प्रबल मिलन पिथ्थ अग्गै चलिय ।—पृ॰ रा॰, ६ ।९३ (ख) दइय बाच सब बीर नै बहुराए कवि चंद । सब सामंत अनंद भो दरसत नट्ठे दंद ।—पृ॰ रा॰, ६ ।१७५ । (ग) सागर जब बसीठ बहुराए । चारिहुँ दिस बारी दोराए ।—चित्रा॰, पृ॰ १४३ ।