बहूदक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बहूदक संज्ञा पुं॰ [सं॰] संन्यासियों का एक भेद । एक प्रकार का संन्यासी । विशेष—ऐसे संन्यासियों को सात घर में भिक्षा मांगकर निर्वाह करना चाहिए । यदि एक ही गृहस्थ भरपेट भोजन दे तो भी नहीं लेना चाहिए । इनके लिये गाय की पूँछ के रोएँ से बँधा त्रिदंड, शिक्य, कौपीन, कमंडलु, गात्राच्छादन, कंथा, पादुका, छत्र, पवित्र, चर्म, सूची, पक्षिणी, रुद्राक्षमाला, बहिर्वास, खनित्र और कृपाण रखने का विधान है । इन्हें सर्वांग में भस्म ओर मस्तक में त्रिपुंड धारण करना चाहिए तथा शिखासूत्र न छोड़ना चाहिए और योग्याभ्यास भी करना चाहिए ।