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बाँधनू

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बाँधनू संज्ञा पुं॰ [हिं॰ बाँधना + ऊ (प्रत्य॰)]

१. वह उपाय जो किसी कार्य को आरंभ करने से पहले सोचा या किया जाय । पहले से ठीक की हुई तरकीब या विचार । उपक्रम । मंसूबा । क्रि॰ प्र॰—बाँधना ।

२. कोई बात होनेवाली मानकर पहले से ही उसकी संबंध में तरह तरह के विचार । ख्याली पुलाव । क्रि॰ प्र॰—बाँधना ।

३. झूठा दोष । मिथ्या अभियोग । तोहमत । कलंक ।

४. कल्पित बात । मन में गढ़ी हुई बात ।

५. कपड़े की रँगाई में वह बंधन जो रँगरेज लोग चुनरी या लहरिएदार रँगाई आदि रँगने के पहले कपड़े में बाँधते हैं । क्रि॰ प्र॰—बाँधना ।

६. चुनरी या और कोई ऐसा वस्त्र जो इस प्रकार बाँधकर रँगा गया हो । उ॰—कहै पद्माकर त्यौं बाँधसू बसनवारी वा ब्रज बसनवारी ह्मो हरनवारी है ।—पद्माकर (शब्द॰) ।