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बाक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बाक ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] बकपंक्ति । बकयूथ [को॰] ।

बाक पु † ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ वक्त्र; प्रा॰ वक्क, राज॰ बाक] मुख । उ॰—बाक घणा फाटा रहै, नाहर डाच निहाल ।—बाँकी॰, ग्रं॰, भा॰

१. पृ॰ २६ ।

बाक पु ^३ संज्ञा स्ञी॰ [सं॰ वाक्, प्रा॰ बाक] वाक् । वाणी । उ॰—नटनागर की न गली तजिहौं, गुरु लोक के बाक गजै न गजै ।—नट॰, पृ॰ ५८ । मुहा॰—बाक न आना = कुछ कह न पाना । मुख से बोल न निकलना । उ॰—बंध नाहिं औ कंध न कोई । बाक न आव कहौं केहि रोइ ।—जायसी ग्रं॰ (गुप्त), पृ॰ ३६२ ।