सामग्री पर जाएँ

बाय

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

बाय † ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वायु]

१. वायु । हवा । उ॰—(क) एक बान वेग ही उड़ाने जातुधान जात, सूखि गए गात हैं पतौआ भए बाय के ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) हित करि तुम पठयो लगे वा बिजना की बाय । ठरी तपन तन की तऊ चली पसीना न्याय ।— बिहारी (शब्द॰) ।

२. बाई । वात का कोप जो प्रायः संनिपात होने पर होता है और जिसमें लोग बकते झकते हैं । उ॰— जीवन जुर जुवती कुपथ्य करि भयो त्रिदोष भरि मदन बाय ।— तुलसी (शब्द॰) ।

बाय ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वापी] बाउली । बेहर । उ॰— अति अगाध अति ओथरो नदी कूप सर बाय । सो ताको सागर जहाँ जाकी प्यास बुझाय ।—बिहारी (शब्द॰) ।

बाय ^३ संज्ञा पुं॰ [अं॰] एक प्रकार का लोहे का पीपा जो समुद्र में या उन नदियों में जिनमें जहाज चलते हैं स्थान स्थान पर लंगर द्वारा बाँध दिए जाते हैं और सिगनल का काम देते हैं ।

२. दे॰ 'लाइफबाय' ।

बाय स्काउट संज्ञा पुं॰ [अं॰] विद्यार्थियों का एक प्रकार का सौनिक ढंग से संघटन जिसका प्रधान उद्देश्य विविध प्रकार से समाज की सेवा करना है । जैसे,— कहीं आग लगने पर तुरंत वहाँ पहुँचकर आग बुझाना, मेले ठेले और पर्वों पर यात्रियों को आराम पहुँचाना, चोर उचक्कों को गिरपतार करना । आहत या अनाथ रोगियों को यथास्थान पहुँचाना, उनके दवादारू और सेवा सुश्रुषा की समुचित व्यवस्था करना, आदि । बालचर । चमू ।

२. उक्त चमू या सेना का सदस्य ।