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बावर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बावर पु † ^१ वि॰ [सं॰ वातुल, प्रा॰ बाउल, हिं॰ बावला, बाउर]

१. पागल । बावला । उ॰—पिय वियोग अस वावर जीऊ, पपिहा जस बोलै पिउ पीऊ ।—जायसी (शब्द॰) ।

२. मूखँ । बेवकूफ । निर्बुद्धि । उ॰—राजै दुहू दिसा फिर देखा । पंडित बावर कौन सरेखा ।—जायसी (शब्द॰) ।

बावर ^२ संज्ञा पुं॰ [फा॰] यकीन । विश्वास । उ॰—गर नहीं बावर तो करना दुक कयास । क्या गंदे मछली नमन तेरे है बास ।—दक्खिनी॰, पृ॰ १८० ।

बावर ^३ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वागुर (=जाल)] जाल । फंदा । उ॰— बावरिया ने बावर डारी, फंद जाल सब कीता रे ।— कबीर॰ श॰, भा॰ २, पृ॰ ८ ।