बिखोण्ड़ा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिखोंड़ा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ बिख ( = विष)] सारे भारत में पाई जानेवाली ज्वार की जाति की एक प्रकार की बड़ी घास जो बारहो महीने हरी रहती है । विशेष—यह जब अच्छी तरह बढ़ जाती है, तब चारे के लिये बहुत उपयोगी होती है; पर अरंभिक अवस्था में इसका प्रभाव खानेवाले पशुओं पर बहुत बुरा और प्रायः विष के समान होता है । इसमें से एक प्रकार के दाने भी निकलते हैं जिन्हें गरीब लोग यों ही पीसकर अथवा बाजरे आदि के आटे के साथ मिलाकर खाते हैं । इसकी कहीं खेती नहीं होती, यह खेतों की मेड़ों अथवा जलाशयों के आसपास आपसे आप होती है । इसका एक नाम कालामुच्छ भी है ।