बिगर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिगर क्रि॰ वि॰ [अ॰ बगैर] बिना । रहित । बगैर । उ॰— तुमहिं सुमिरि सब काज, सिद्धि होत सुकबीन के । रचत कछुक रघुराज, बिघन बिगर पूरण करहु ।—रघुराज (शब्द॰) ।
बिगर क्रि॰ वि॰ [अ॰ बगैर] बिना । रहित । बगैर । उ॰— तुमहिं सुमिरि सब काज, सिद्धि होत सुकबीन के । रचत कछुक रघुराज, बिघन बिगर पूरण करहु ।—रघुराज (शब्द॰) ।