बिगरना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिगरना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ बिगड़ना] दे॰ 'बिगड़ना' । उ॰— (क) विगरत मन सन्यास लेत जल नावत आम घरो सो ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) साहेब कबीर मोहिं मिलिगे सतगुरु, बिगरल मोर बनाए ।—कबीर॰, श॰, भा॰ ३, पृ॰ १६ ।