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बिगोना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिगोना क्रि॰ सं॰ [सं॰ विगोपन]

१. नष्ट करना । विना श करना । बिगाड़ना । उ॰—(क) सूर सनेह करै जो तुम सों सो पुनि आप बिगोऊ ।—सूर (शब्द॰) । (ख) जिन्ह एहि बारि न मानस धोए । ते पापी कलिकाल बिगोए ।— तुलसी (शब्द॰) । (ग) तुम जब पाए तबहीं चढ़ाए ल्याए राम न्याव नेक कीजे बीर यों बिगोइयत हैं ।—हृदयराम (शब्द॰) ।

२. छिपाना । दुराना । उ॰—द्वैत बचन को स्मरण जु होवै । ह्वै साक्षात तू ताहि बिगोवै ।—निश्चलदास (शब्द॰) ।

३. तंग करना । दिक करना ।

४. भ्रम में डालना । बहकाना । उ॰—(क) प्रथम मोह मोहिं बहुत बिगोवा । राम बिमुख सुख कबहु न सोवा ।—तुलसी (शब्द॰) (ख) ताहि बिगोय सिवा सरजा, भनि भूषन औनि छपा यों पछारयो ।— भूषन (शब्द॰) ।

५. व्यतीत करना । बिताना । उ॰— बहु राछसा सहित तरु के तर तुमरे बिरह निज जमन बिगो- वति ।—तुलसी (शब्द॰) ।