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बिग्गाहा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिग्गाहा संज्ञा पुं॰ [सं॰ विगाथा] आर्या छंद का एक भेद जिसे 'उदुगीति' भी कहते हैं । इसके पहले चरण में १२, दूसरे में १५, तीसरे में १२, ओर चोथे में १८ मात्राएँ होती हैं । जैसे,—राम भजहु मन लाई, तन मन धन के सहित मीत रामहिं निस दिन ध्याओ, राम भजै तबहिं जान जग जीता ।