बिड़वना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिड़वना पु † ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ विट् (जोर से चिल्लाना)] तोड़ना । उ॰—यद्यपि अलक अंज गहि बाँधे तऊ चपल गति न्यारे । घूँघट पट बागुर ज्यों बिड़वत जतन करत शशि हारे ।—सूर (शब्द॰) ।
बिड़वना पु † ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ बिढ़वना] कमाना । पैदा करना । उ॰—रहूँ भरोसे राम के, बनिजे कबहुँ न जाँव । दास मलूका यों कहैं, हरि बिड़वै मैं खाँव ।—मलूक॰ बानी, पृ॰ ३४ ।