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बितना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बितना ‡ ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ बित्ता] दे॰ 'बित्ता' । उ॰—इंद्र गरब हर सजह में गिरि नख पर धर लीन । इह इतना बितना भरा कहु कितना बल कीन ।—रसनिधि (शब्द॰) ।

बितना पु ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ बीतना] गुजरना । व्यतीत होना । उ॰—नद दास लगे नैनि लाल सों, पलक ओट भए बितत जुग चारि ।—नंद ग्रं॰, पृ॰ ३५३ ।