बित्त
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बित्त संज्ञा पुं॰ [सं॰ वित्त]
१. धन । दौलत ।
२. हैसियत । औकात ।
३. सामर्थ्य । शक्ति । बूता । उ॰—किसी की मड़ी में आकर अपने बित्त से बढ़कर काम मत करो । पर कोइ यदि अपने बित्त के बाहर माँगे या ऐसी वस्तु माँगे जिससे दाता की सर्वस्व हानि होती हो तो वह दे कि नहीं ? । यौ॰—बित्तहीन = धनहीन । निर्धन । उ॰—दीन बित्तहीन कैसे दूसरी गढ़ाइहौं ।—तुलसी (शब्द॰) ।