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बिथरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिथरना क्रि॰ अ॰ [सं॰ विस्तरण, प्रा॰ विथ्थरण या विकिरण]

१. छितराना । बिखरना । इधर उधर होना ।

२. अलग अलग होना । खिल जाना । उ॰—परा थिरति कंचन महँ सीसा । बिथरि न मिलइ सावँ पइ सीसा ।—जायसी (शब्द॰) ।