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बिथरनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिथरनी पु † संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वैतरणी] दे॰ 'वैतरणी' । उ॰— मन सूधा कौ कूच कियौ है, ग्यान बिथरनी पाई । जीव की गाँठि गुढ़ी सब मागी, जहाँ की तहाँ ल्यो लाई ।—कबीर ग्रं॰, पृ॰ १८६ ।