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बिदरना

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शब्दसागर

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बिदरना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ विदीर्ण] विदीर्ण होना । खंड खंड होना । फटना । उ॰—(क) हृदय न बिदरेउ पंक जिमि बिछुरत प्रीतम नीर ।—मानस, २ । १४६ । (ख) हृदय दाड़िम ज्यों न बिदरयो समुझि लील सुभाउ ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ३५२ ।

बिदरना पु ^२ वि॰ [वि॰ स्त्री॰ बिदरनि] फाड़नेवाला । चीरनेवाला । विदीर्ण करनेवाला । उ॰—जोति रूप लिंगमई अगनित लिंगमई मोक्ष बितरनि बिदरनि जग जाल की ।— तुलसी ग्रं॰, पृ॰ २४५ ।