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बिफरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिफरना पु † क्रि॰ अ॰ [सं॰ विस्फुरण, या विप्लवन] विप्लव करने पर उद्यत हो जाना । बागी होना । विद्रोही होना । उ॰—घूमति हैं झुक झूमति हैं मुख चूमति हैं थिर है न थकी ये । चौंकि परै चितवैं बिफरै सफरै जलहीन ज्यों प्रेम पकी ये । रीझति हैं खुलि खोझति हैं अँसुवान सों भीजती सोभ तकी ये । ता छिन तें उछकी न कहूँ सजनी अँखियाँ हरि रूप छकी ये ।—(शब्द॰) ।

२. बिगड़ उठना । नाराज होना । उ॰—बिफरे सब बीर सुधीर मन ।—ह॰ रासो, पृ॰ १५७ ।