बिबरन
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिबरन पु ^१ वि॰ [सं॰ विवर्ण]
१. जिसका रंग खराब हो गया हो । बदरंग ।
२. चिंता या ग्लानि आदि के कारण जिसके चेहरे का रंग उड़ गया हो । जिसके मुख की कांति नष्ट हो गई हो । जिसका चेहरा उतरा हो । उ॰—(क) बिबरन भयउ निपट नरपालू । दामिन हनेउ मनहु तरु तालू ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) बिबरन भयउ न जाइ निहारी । मारेसि मनहु पिता महतारी ।—तुलसी (शब्द॰) ।
बिबरन पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ विवरण] दे॰ 'विवरण' । उ॰— ज्ञान सँपूरन प्रेम रस बिबरन करो बिचार ।—द॰ सागर, पृ॰ २२ ।