बिरथ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिरथ पु ^१ वि॰ [सं॰ व्यर्थ या वृथा] दे॰ 'बिरथा' । उ॰— सब धर्म बिधंसक । निरदै महाबिरथ पशुहिंसक ।—नंद॰ मतिभ्रंसक ग्रं॰, पृ॰ २५२ ।
बिरथ ^२ वि॰ [सं॰ विरथ] दे॰ 'विरथ' ।
१. जो रथ पर या रथवाला न हो । उ॰—रावन रथी बिरथ रघुबीरा ।—मानस, ६ ।७९ ।
२. रथ से च्युत । रथ से रहित । उ॰—धरि कच बिरथ कीन्ह महि गिरा ।—मानस, ३ ।२३ ।