बिरथा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिरथा † ^१ वि॰ [सं॰ वृथा] निरर्थक । फिजूल । बेकाम । व्यर्थ । उ॰—ऊठत बैठत जागत, यहु मन तुझे चितारे । सूख दूख इस मन की बिरथा तुझही आगे सारे ।—संतबानी॰, भा॰ २, पृ॰ ४८ ।
बिरथा ^२ क्रि॰ वि॰ बिना किसी कारण के । अनावश्यक रूप से ।