बिरस
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिरस ^१ वि॰ [सं॰ विरस] रसहीन । शुष्क ।
बिरस ^२ संज्ञा पुं॰ अरसिकता । रसविमुखता । विगाड़ । उ॰—ऐसें जान ? रस माहिं बिरस अनीति है ।—घनानंद, पृ॰ ७३ ।
बिरस ^१ वि॰ [सं॰ विरस] रसहीन । शुष्क ।
बिरस ^२ संज्ञा पुं॰ अरसिकता । रसविमुखता । विगाड़ । उ॰—ऐसें जान ? रस माहिं बिरस अनीति है ।—घनानंद, पृ॰ ७३ ।