बिरहा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिरहा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ विरह] वियोग । उ॰—दरिया गुर किरपा करी, बिरहा दिया पठाय । यह बिरहा मेरे साध को सोता लिया जगाय ।—दरिया॰ बानी, पृ॰ ९ ।
बिरहा ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ विरह] एक प्रकार का गीत जो प्रायः अहीर लोग गाते हैं । इसका अतिम शब्द प्रायः बहुत खींचकर कहा जाता है । जैसे,—बेद, हकीम बुलाप्रो कोई गोइयाँ कोई लेओ री खबरिया मोर । खिरकी से खिरकी ज्यों फिरकी फिरति दुओ पिरकी उठल बड़ जोर ।—बलबीर (शब्द॰) । मुहा॰—झार बिरहा गाना = बढ़कर ऐसी बातें कहना जो प्रायः कार्य रूप में परिणत न हो सकती हों ।