बिराना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिराना पु ^१ वि॰ [फा़॰ बेगानह्] [वि॰ स्त्री॰ बिरानी]
१. पराया । जो अपने से अलग हो । उ॰—मैं तुम्हारे घर से चली आई तो बिरानी हो गई ।—मान॰, मा॰ ५, पृ॰ १०२ ।
२. दूसरे का । जो अपना न हो । उ॰—अरुन अधर, दसननि दुति निरखत, विद्रु म सिखर लजाने । सूर स्याम आछौ बपु काछे, पटतर मेटि बिराने ।—सूर॰, १० ।१७५६ ।
बिराना † ^२ क्रि॰ अ॰ [अनु॰] किसी को दिखाकर चिढा़ने कै लिये मुहँ विलक्षण मुद्रा बनाना । बिरावना । मुँह चिढा़ना । दे॰ 'मुँह' का मुहा॰ । उ॰—दई सैन सब सखन को लै गोरस समुदाय । गए निकरि जब दूरि तब आपहु भगे बिराय ।—रघुनाथ (शब्द॰) ।