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बिसतरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिसतरना ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ विस्तारण] विस्तार करना । बढ़ाना । फैलाना । उ॰—एक पल ठाढ़ी ह्वै कै सामुहें रही निहारि फेरि कै लजौंही, भौह सोचै बिसतरि कै ।—रघुनाथ (शब्द॰) ।

बिसतरना पु ^२ क्रि॰ अ॰ [सं॰ विस्तरण] विस्तृत होना अभिवृद्धि होना । बढ़ना । उ॰—बिहुँसि गरे सों लागी मिली रघुनाथ प्रभा अंगनि सो गुन रूप ऐसी बिसतरि गो ।—रघुनाथ (शब्द॰) ।