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बिसनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिसनी ^१ वि॰ [सं॰ व्यसनिन्]

१. जिसे किसी बात का व्यसन या शोक हो ।

२. जो अपने व्यवहार के लिये सदा बढ़िया चोजें ही डूँढ़ा करे । जिसे चीजें जल्दी पसंद न आएँ । जो व्यवहार की साधारण वस्तु सामने आने पर नाक मों सिकोड़े ।

३. जिसे सफाई, सजावट या बनाव सिंगार बहुत पसंद हो । छैला । चिकनिया । शौकीन ।

४. वेश्यागामी । रंडीबाज । उ॰—ज्ञानी मूढ़ औ चेला चोर साहु भर भूना । बिस्वा बिसनी भेड़ कसाई नाहिं कोई घर सूना ।—पलटु॰ बानी, भा॰ ३, पृ॰ २७ । (ख) रडियाँ बिसनियों से रुपया लेकर सारंगी ही में डाल देती हैं ।—प्रेमधन॰, भा॰, २, पृ॰ ३३० ।

५. दुःखदायक । कष्टदायक । उ॰—क्यों जियौ कैसी करौ बहुरयौ बिसु सी बिसनी बिसवासिनि फूली ।—केशव ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ६६ ।

बिसनी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ बिसिनो, प्रा॰ बिसणी]

१. कमलिनी ।

२. लता ।—अनेकार्थ॰, पृ॰ ८८ ।