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बिसात

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बिसात संज्ञा स्त्री॰ [अ॰]

१. हैसियत । समाई । वित्त । धन । संपत्ति का विस्तार । औकात । जैसे,—मेरी बिसात नहीं है कि मैं यह मकान मोल लूँ ।

२. जमा । पूँजी । उ॰—(क) मन धन हती बिसात जो सो तोहिं दियो बताय । बाकी बाकी बिरह की प्रीतम भरी न जाथ ।—रसनिधि (शब्द॰) । (ख) हे रघुनाथ कहा कहिए पिय की तिय पूरन पुन्य बिसात सी ।—रघुनाथ (शब्द॰) ।

२. सामर्थ्य । हकीकत । स्थिति । गणना । उ॰—(क) मोदिनि मेरु अजादि सुर सो इक दिन नसि जात । गजश्रुति सम नर आयु चर ताकी कौन बिसात ।—विश्राम (शब्द॰) । (ख) स्त्री की बिसात है कितनी, बड़े बड़े योगियों के ध्यान इस बरसात में छूट जाते हैं ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) । (ग) समय की अनादि अनंत्त धारा के प्रवाह में १९ वर्ष के जीवन की बिसात ही क्या ।— बालकृष्ण (शब्द॰) ।

४. शतरंज या चौपड़ आदि खेलने का कपड़ा या बिछोना जिसपर खाने बने होते हैं । उ॰— हित बिसात धर मन नरद, चलि कै देइ न दाव । यासों प्रीतम की रजा बाजू खेलत चाव ।—रसनिधि (शब्द॰) ।

५. दरी । फर्श पर बिछाई जानेवाजी कोई वस्तु । बिछावन ।