बिहरना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]बिहरना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ विहरण] घूमना फिरना । सैर करना । भ्रमण करना । उ॰—जिन बीथिन बिहरै सब भाई । थकित होहिं सब लोग लुगाई ।—तुलसी (शब्द॰) ।
बिहरना पु † ^२ क्रि॰ स॰ [सं॰ विघटन, प्रा॰ विहडन]
१. फटना । दरकना । विदीर्ण होना । उ॰—तासु दूत ह्वै हम कुल बोरा । ऐसेहु उर बिहरु न तोरा ।—तुलसी (शब्द॰) ।
२. टुकड़े टुकड़े होकर टूटना । फूटकर बिखर जाना । उ॰—हृदय बड़ दारुन रे पिया बिनु बिरहि न जाए ।—विद्यापति, पृ॰ १५ ।